ऋचा श्रीवास्तव पटना
01-08-2018
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(पर्दा)
जब नहीं हटाते हम
खिड़की, दरवाज़ों और शीशों पर
पड़ा हुआ गहरा पर्दा
तब नहीं आने देना चाहते हम
बाहरी हवा और रौशनी को
अपने घरों के अंदर
जब सोच लेते हैं हम कि
जो हो रहा है बाहर,
उसका नहीं है कोई नाता हमारे अंदर से
तब उसी समय एक मोटा सा पर्दा
पड़ जाता है हमारी अक़्ल पर भी
छा जाता है एक घना अँधेरा
और हम डूब जाते हैं
अपने ही भीतर के किसे कुएं में
हमेशा-हमेशा के लिए
और बदल जाती है हमारी पूरी ज़िन्दगी!
01-08-2018
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(पर्दा)
जब नहीं हटाते हम
खिड़की, दरवाज़ों और शीशों पर
पड़ा हुआ गहरा पर्दा
तब नहीं आने देना चाहते हम
बाहरी हवा और रौशनी को
अपने घरों के अंदर
जब सोच लेते हैं हम कि
जो हो रहा है बाहर,
उसका नहीं है कोई नाता हमारे अंदर से
तब उसी समय एक मोटा सा पर्दा
पड़ जाता है हमारी अक़्ल पर भी
छा जाता है एक घना अँधेरा
और हम डूब जाते हैं
अपने ही भीतर के किसे कुएं में
हमेशा-हमेशा के लिए
और बदल जाती है हमारी पूरी ज़िन्दगी!
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