Sunday, December 23, 2018

" कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी। "

मोहब्बत की बात मत कर, बच्चों की आँखों में देख 
कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी,
दायरों की ही सोच, आसमान को भूल जा
कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी।  

अगर मर के पा सकते, तो कोई बात होती 
इस जिस्म का क्या है, रूह तो साथ होती 
यूँ ही तमाम गुज़रे का हौसला रखना है अभी 
कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी। 

सब मशगूल है,  तो तू क्यूँ बेचैन है 
क्यों अपने होने का मिटता हुआ चैन है, 
उन तक बात पहुंची है, तो वो भी तौलेंगे कभी 
कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी।   

मुमक़िन है तुम्हारा ऐतबार कहीं ऐतराज़ हो 
जो सजाते हो कल का ख़्वाब, वो किसी का आज हो 
तुम भी पा लो ये क्यूँ मानेंगे सभी
कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी।  

ख़्वाबों की बात मत कर, बच्चों की आँखों में देख 
कि तुझे, ज़िंदा रहना है अभी,
फ़ुर्क़त की ही सोच, वस्ल को भूल जा
कि तुझे ...., ज़िंदा रहना है अभी। 


निर्मल अगस्त्य 
23/12/2018, पटना 

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