Sunday, November 22, 2015

गान्धारी_पट्टी वाली

गान्धारी_पट्टी वाली 


उस आशीर्वाद से सदैव दुःख उपजता है 
जो छलने के पहले या छल लेने के 
बाद दिया जाता है। 
उस छमायाचना से सदैव घृणा उपजती है 
जो अहंकार को कुछ पलों के लिए 
छुपाने के लिए की जाती है। 


लोग उनसे अविश्वास सीख जाते हैं 
जो स्वंय अविश्वास में जीता रहा हो 
खोखली विनम्रता ओढ़े हुए
किसी के विस्तार को काटने में मगन,
लेकिन उनसे कुछ नहीं ले पाते 
जो चिल्लाता रहा हो 
अपशब्द बोलता रहा हो 
किसी के विस्तार और प्रगल्भता के लिए। 


धरती पर कभी एक गान्धारी हुआ करती थी
अमृत पी के आई थी शायद,
अभी भी बहुतों में जीवित है। 
आँख वाले ये सोच रहे हैं 
कि सम्बन्धों में ये परेशानी क्यूँ है,
कुछ लोगों के अन्दर छिपी गान्धारी ये सोच रही है
कि बाक़ी करम के मारों की आँख क्यूँ  है।        
 

निर्मल अगस्त्य 
23-11-2015
पटना। 

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