Wednesday, February 18, 2015

"हर पल नया है"

"हर पल नया है"

ये पत्तों को भी
सरसराने का अधिकार है,
नये अक्षरों को भी
शब्द बनाने का हक़ है।
हक़ है नये शब्दों का
कि वे भी सुने जायें और छपें,
नये हस्ताक्षरों कों भी
चमकने का हक़ है।
ये दुनिया हर पल नई है
हर अगली सांस नई है
हर अगली सुबह नई है,
सहेजना अच्छी बात है
और ज़रूरी  भी
लेकिन सहेजने के क्रम में
इतनी जगह तो
ज़रूर बनाई जा सकती है
जिसमें आ पायें
नये पत्ते, नये चेहरे
नये ख़्वाब, नई पहल
नये शब्द और नई कलम।

"निर्मल अगस्त्य"

   
   

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